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डर के आगे मंच है : कैसे बनें एक अच्छे प्रवक्ता?

बड़ा सा ऑडिटोरियम, लाखों श्रोता, तालियों का शोर और मंच पे खड़े आप. ये सब सुनने और देखने में एक खूबसूरत सपना सा लगता है ना?

ऐसा क्या खास है Sandeep Maheshwari, Chetan Bhagat, Robin Sharma और Shiv Khera जैसे बहु चर्चित और विख्यात पब्लिक स्पीकर्स में?  ऐसा क्या करते हैं ये जो आप और हम नहीं कर पाते? आखिर ये भी आप और हम जैसे इंसान ही हैं?

जहाँ इन्हे सुनने के लिए लाखों की भीड़ पैसे देकर जमा होती है और इतने लोगों के बीच भी इनका हौंसला दम नहीं तोड़ता. वहीँ मंच पे खड़े होने के ख्याल ऐ डर से ही हमें पसीना आने लगता है, हाथ पैर ठन्डे पड़ जाते हैं और जी घबराने लगता है!

अंग्रेजी भाषा में इसे Glossophobia (Fear Of Public Speaking) का नाम दिए गया है. खैर आज मैं आपके सामने कुछ 5 ऐसी बातें रखूँगा जिसे करने के बाद आपका डर हमेशा के लिए ख़तम हो जायेगा.

रखें खुद को Physically और  Mentally तैयार:

जब बात आती है मंच पे खड़ा होक बात करने की, डर लगना लाज़मी है परन्तु इस डर को काबू में रखना भी बहुत जरुरी है. खुद से पैदा होने वाले इस डर की सीधी झलक आपके Body Language और चेहरे पे दिखाई देती है . किसी भी presentation या stage show के पहले थोड़ी वर्ज़िश करें.

वर्जिश सामान्य घरेलु exercise जैसे की :

  • Arm Roll
  • Bending
  • Neck Roll
  • Shoulder Roll
  • Twisting

आपके रक्त चाप को बड़ा कर आपके दिमाग तक ऑक्सीजन का बहाव भी तेज कर देता है. आपके शरीर में तनाव पैदा करने वाले मांस पेशियाँ शांत हो जाएँगी और आप stress फ्री महसूस करेंगे.

अभ्यास , अभ्यास और अभ्यास :

करत करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान“..अर्थात निरंतर अभ्यास से अकुशल इंसान भी कुशल बन सकता है. कबीर जी का ये दोहा एक दम सटीक बैठता है इस मौके पर. अपने मन का डर भागने के लिए जितना हो सके उतना अभ्यास करें. इस से आपकी यादाश्त पक्की हो जाएगी और आप खुद और भी confident महसूस करेंगे.

विकर्षण से खुद को संभालें :

मंच पे खड़े होकर बात करते वक़्त अक्सर audience में बैठे किसी इंसान की कोई छोटी सी हरकरत (जैसे की किसी महिला की खूबसूरती, किसी बच्चे के रोने की आवाज़ या फिर किसी के मोबाइल का रिंगटोन )आपका ध्यान खींच कर आपको मुद्दे से भटका सकती है.

एक अच्छा प्रवक्ता खुद को इस हालात में संजोय रखता है. घर में TV के सामने खड़े होकर किसी छोटे बच्चे को खिलते हुए अभ्यास करें. इस से आपको ध्यान लगाने और शोर काटने की मानसिक मजबूती मिलेगी.

Add Humor To Your Content (जोक्स का सहारा लें ):

मंच पे खड़ा बड़े से बड़ा दिग्गज भी इस परेशानी से लड़ता है. अक्सर देर तक चलने वाले लम्बे भाषण बोरिंग होने लगते हैं. इस हालत में आपके श्रोताओं का ध्यान इधर उधर भटकना लाज़मी है . काफी बार लोग बीच से उठ कर भी चल देते हैं. इस परिस्थिति से खुद को बचने के लिए एक प्रोफेशनल वक्ता छोटे – 2 प्रैक्टिकल जोक्स का सहारा लेता है. अक्सर ये जोक्स audience में से बैठे किसी एक के ऊपर बनाये जाते हैं.

इस से सबका ध्यान वापिस खींचने में काफी मदद मिलती है.

गति से सावधान :

बोलते वक़्त अक्सर खुद के बात करने की गति का अंदेशा नहीं लग पाता लेकिन मंच पे खड़े हो कर बात करते वक़्त सबसे ज्यादा इसी बात पे ध्यान देना होता है. याद रखिये, आपका कहा हुआ सामने वाले को समझ में भी आना चाहिए इसके लिए जरुरी है आप धीरे बोलें, मुँह खोल कर बोलें और हर वाक्य के ख़तम होने के बाद काम से 2- 3 सेकंड का pause लें. इस से आपको ये पाता लग जायेगा की सामने बैठे लोग आपकी बात को कितना समझ पा रहे हैं.

 

आप बस इन चीज़ों का ध्यान रखें और मंच पे बिना डरे खुल के अपने भाव प्रकट करें.

 

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