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बाप से मांगा कमाई का हिसाब, Pocket Money ना बढ़ने पे डाली RTI

ना  बीवी न बच्चा, ना बाप बड़ा न मइया the whole thing is that की भइय्या सबसे बड़ा रुपइया. सं 1976 में मेहमूद साहब का गाया हुआ ये गाना नॉएडा प्रवासी अग्रवाल परिवार के घर की कहानी बन चूका है.

मुकुंद अग्रवाल जी , जो खुद दिल्ली पटिआला कोर्ट में वकील क पेशे से लड़ते हैं अपने लड़के को वकील बनाने की चाहत रखते थे. 12वी क बाद उन्होंने उसे वकालत की डिग्री के लिए यूनिवर्सिटी में दाखिला दिलवा दिया था. उन्हें क्या पता था, एक दिन अपने ही घर में खुद क लिए लड़ना पड़ेगा?

अपने बाप को पॉकेट मनी बढ़ाने की अर्ज़ी पे न मंज़ूरी मिलने पर, अविनाश (बड़े सुपुत्र) ने उठाये ठोस कदम.  ठोका अपने बाप पर RTI का दावा और मांग लिया मासिक कमाई का हिसाब.

अविनाश का कहना है , एक वक़्त था जब मैं शौख से मार्लबोरो जला लिया करता था मगर आज छोटी गोल्ड फ्लैक भी महंगी लगती है. खर्चे के डर से, दोस्तों क साथ भी पार्टी नहीं कर पता हूँ अब. अपनी चूल मिटाने के लिए बीड़ी और देसी ठर्रे पर उतर आया हूँ.

फ़्रस्ट्रेशन को छुपाते हुए अविनाश कहते हैं, बढ़ती हुई महंगाई का असर अब मेरे  रिश्तों पे भी पड़ने लगा है. मेरे बाप की कंजूसी की वजह से मेरा 5 साल पुराना रिश्ता आज टूटने की कगार पे है! पिछले कई महीनों से मैं अपनी GF को शॉपिंग नहीं करवा पाया हूँ और ना ही कोई फिल्म दिखाई हैं.

हद तो तब हो गयी जब गिफ्ट देने क डर से उसके (GF) की बर्थडे पर बुखार और वैलेंटाइन्स डे पर दस्त का बहाना देकर मुझे घर रहना पड़ा.

सख्ती से युवा मोर्चा संभाले अविनाश किसी भी सेटलमेंट क मूड में नहीं दिख रहे हैं. अपने क बाप की कंजूसी से तंग आकर छोटे भाई-बहन भी इस जुंग में कूद पड़े हैं..

इन्साफ न मिलने पर कोर्ट तक घसीट ले जाने की दी है धमकी.

Disclaimer: इस कहानी का फिलहाल वास्तविकता से कोई नाता नहीं है, क्या पता आगे हो जाये|

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